एक अधूरी दास्तान शहर की हलचल भरी गलियों में
एक अधूरी दास्तान शहर की हलचल भरी गलियों में जहां हर चेहरा किसी न किसी कहानी को समेटे चलता है, वहीं एक कहानी थी आरव और सिया की। दोनों बचपन के दोस्त थे। एक ही कॉलोनी में पले-बढ़े, एक ही स्कूल में पढ़े और एक ही पार्क में शामें बिताईं। उनकी दोस्ती धीरे-धीरे कब मोहब्बत में बदल गई, शायद उन्हें खुद भी पता नहीं चला। सिया मासूम थी, सपनों से भरी हुई। उसकी आँखों में एक चमक थी, जो आरव को हमेशा खींच लाती थी। आरव खुद में थोड़ा गम्भीर, मगर दिल का बेहद साफ। वो सिया की हंसी पर अपनी जान लुटा सकता था। दोनों एक-दूसरे के बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। कॉलेज खत्म होते-होते दोनों का रिश्ता गहराता गया। आरव ने मन ही मन तय कर लिया था कि अब बस नौकरी मिलते ही वह सिया का हाथ मांग लेगा। सिया भी इसी ख्वाब को दिल में सजाए बैठी थी। लेकिन किस्मत की किताब में कुछ और ही लिखा था। आरव ने इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की और एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब मिल गई। अब उसका सपना था अपने पैरों पर खड़ा होकर सिया को अपने माता-पिता से मिलाना और रिश्ते की मंजूरी लेना। मगर तभी, एक दिन सिया के घर में हलचल मच गई। सिया के...